Mehndi Shayari

Mehndi Shayari

मेहंदी की शायरी

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उजली-उजली धूप की रंगत भी फ़ीकी पड़ जाती है
आसमान के हाथों जब शाम की मेहंदी रच जाती है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है
ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है

वो मेहंदी के हाथों में क्या तराशेंगे नाम हमारा,
जब नाम ही छुपा लिखा है उनके हाथों में।

“पूरी मेहंदी भी लगानी नहीं आती अब तक
क्यूँ कर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का“
– दाग़ देहलवी

अल्लाह-रे नाज़ुकी कि जवाब-ए-सलाम में
हाथ उस का उठ के रह गया मेहंदी के बोझ से
~रियाज़ ख़ैराबादी

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